रोबोटिक वर्कफ़ोर्स बनाने की इस वैश्विक होड़ में, Figure AI, Inc. ने मानो अपनी रफ़्तार में जेटपैक लगा लिया है। Shawn Ryan Show पर एक बेबाक बातचीत के दौरान, कंपनी ने खुलासा किया कि वे अब महज़ 90 मिनट में एक पूरा ह्यूमनॉइड रोबोट असेंबल कर सकते हैं। यह कोई भविष्य की कोरी कल्पना नहीं है; यह उनकी वर्तमान क्षमता है जब उनकी प्रोडक्शन लाइन पूरी रफ़्तार से चलती है। कंपनी का लक्ष्य अगले एक दशक के भीतर सालाना 10 लाख यूनिट्स बनाने का है। ज़रा सोचिए, हम आधिकारिक तौर पर ह्यूमनॉइड्स के “साइंस प्रोजेक्ट” वाले दौर को पीछे छोड़ चुके हैं और अब बड़े पैमाने पर असेंबली लाइन के युग में कदम रख चुके हैं।

इस मैन्युफैक्चरिंग क्रांति के केंद्र में जो रोबोट है, उसकी लंबाई 5 फीट 6 इंच है, वज़न लगभग 61 किलोग्राम है और यह एक बार चार्ज करने पर चार से पांच घंटे तक काम कर सकता है। बैटरी खत्म होने पर, यह महज़ एक घंटे में रिचार्ज हो जाता है—इसके लिए इसे बस एक इंडक्टिव चार्जिंग पैड पर खड़ा होना पड़ता है, जहाँ इसके पैरों के ज़रिए वायरलेस तरीके से लगभग दो किलोवाट बिजली खींची जाती है। चलने और संतुलन बनाने से लेकर जटिल कामों तक, इसकी हर हरकत पूरी तरह से Figure के Helix neural network द्वारा संचालित होती है; यानी इसके पीछे कोई पारंपरिक, हाथ से लिखा हुआ कोड नहीं है। जब इसकी मजबूती के बारे में पूछा गया, तो Figure के प्रतिनिधि ने बड़ी ईमानदारी से कहा, “कभी-कभी गिरने पर इनकी गर्दन टूट जाती है, तो कभी यह बिल्कुल सही-सलामत बच जाते हैं।”
उत्पादन की यह रफ़्तार महज़ दिखावे के लिए नहीं है। Figure AI ने पहले ही ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग के लिए BMW और लॉजिस्टिक्स व रियल एस्टेट के लिए Brookfield जैसे दिग्गजों के साथ कमर्शियल एग्रीमेंट कर लिए हैं। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि अगले 60 दिनों के भीतर दो और बड़े ग्राहकों के नामों की घोषणा की जाएगी। इन रोबोट्स में पांचवीं पीढ़ी के हाथ (fifth-generation hands) लगे हैं जिनमें कैमरे और टैक्टाइल सेंसर्स (tactile sensors) इनबिल्ट हैं। सुरक्षा के लिए इनका शरीर फोम से ढका हुआ है और इनके “कपड़े” ऐसे हैं जिन्हें बिना किसी औज़ार के आसानी से निकाला जा सकता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
रोबोटिक्स की दुनिया में सबसे बड़ी अड़चन कभी रोबोट खुद नहीं रहा, बल्कि वह फैक्ट्री रही है जो उसे बनाती है। जहाँ दूसरे प्रतिस्पर्धी अभी सिर्फ डेमो दिखाने में व्यस्त हैं, वहीं Figure का पूरा ध्यान प्रोडक्शन को स्केल करने पर है। प्रति यूनिट 90 मिनट का असेंबली टाइम जनरल-पर्पस रोबोट्स के अर्थशास्त्र और उनकी उपलब्धता को बुनियादी तौर पर बदल देता है। यह महंगे और इकलौते प्रोटोटाइप बनाने के बजाय एक स्टैंडर्ड प्लेटफॉर्म के बड़े पैमाने पर उत्पादन की ओर एक रणनीतिक बदलाव है। एआई-फर्स्ट कंट्रोल सिस्टम, जो प्रोग्रामिंग के बजाय खुद सीखता है, यह दर्शाता है कि Figure सिर्फ एक बेहतर रोबोट नहीं बना रहा—बल्कि वह ह्यूमनॉइड दुनिया का Ford Model T तैयार करने की कोशिश कर रहा है। अब मुकाबला सिर्फ इस बात का नहीं है कि किसका रोबोट ज़्यादा फुर्तीला है, बल्कि इस बात का है कि कौन हज़ारों की तादाद में इन्हें बनाकर तैनात कर सकता है।
