Northwestern के AI रोबोट: चोटिल होने पर भी नहीं रुकेंगे 🤖

Northwestern University के इंजीनियरों ने रोबोट्स की एक ऐसी नई प्रजाति तैयार की है, जिसका शायद एक ही मूल मंत्र है: हार न मानना। ये अजीबोगरीब, तीलियों जैसे दिखने वाले “लेग्ड मेटा-मशीन्स” (legged metamachines) दुनिया के पहले ऐसे रोबोट हैं, जिन्हें असल दुनिया में कदम रखने से पहले पूरी तरह से कंप्यूटर के भीतर ‘इवॉल्व’ (evolve) किया गया है। और एक बार जब ये मैदान में उतरते हैं, तो पैर कटने जैसी गंभीर चोट—जो किसी भी दूसरे ‘वाइल्ड रोबोट’ के लिए जानलेवा साबित हो सकती है—के बावजूद ये हार नहीं मानते और बस चलते रहते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया को लीड रिसर्चर Sam Kriegman “इंस्टेंट इवोल्यूशन” (instant evolution) का नाम देते हैं, जो जितनी दिलचस्प है, उतनी ही हैरान करने वाली भी। एक AI एल्गोरिदम कंप्यूटर सिमुलेशन में शून्य से रोबोट डिजाइन करता है, जिसका एकमात्र लक्ष्य होता है—लोकोमोशन यानी हरकत करना। यह AI ऐसे-ऐसे डिजाइन तैयार करता है जिनकी कल्पना शायद ही कोई इंसान कर पाए। जैसे ही एक सफल ब्लूप्रिंट तैयार होता है, लेगो (Lego) जैसे मॉड्यूल्स को तेजी से असेंबल किया जाता है और ये मशीनें जमीन पर उतरते ही फर्राटा भरने लगती हैं।

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इनकी सादगी और लचीलापन (resilience) वाकई काबिले तारीफ है। इन रोबोट्स के पास न आंखें हैं, न कान और न ही कोई बाहरी सेंसर। हर मॉड्यूल अपने आप में एक आत्मनिर्भर रोबोट है, जिसकी अपनी मोटर, बैटरी और कंप्यूटर है, और यह सिर्फ एक जॉइंट के इर्द-गिर्द घूम सकता है। इसके बावजूद, इनमें एक जन्मजात “एथलेटिक इंटेलिजेंस” (athletic intelligence) है। उन्हें सहज रूप से पता चल जाता है कि कब वे पलट गए हैं या कब उनका कोई अंग कटकर अलग हो गया है। वे तुरंत अपनी चाल को परिस्थितियों के अनुसार ढाल लेते हैं और आगे बढ़ना जारी रखते हैं। यहाँ तक कि कटा हुआ पैर भी अपने आप लुढ़कना बंद नहीं करता।

आखिर यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

एक बात साफ कर दें: ये मशीनें फिलहाल आपका पिज्जा डिलीवर करने नहीं आ रही हैं। रिसर्चर्स ने खुद माना है कि ये अभी “उपयोगी” नहीं हैं। लेकिन इस प्रोजेक्ट का मकसद तत्काल इस्तेमाल नहीं, बल्कि भविष्य की बेहद मजबूत मशीनें तैयार करना है। आज के दौर के ज्यादातर रोबोट काफी नाजुक होते हैं; एक पैर टूटने का मतलब है करोड़ों डॉलर की मशीन का कबाड़ हो जाना। लेकिन ये मेटा-मशीन्स एक ऐसा रास्ता दिखाती हैं जहाँ रोबोट बिना किसी इंसानी मदद के, असल दुनिया के अनिश्चित माहौल में न सिर्फ जीवित रह सकते हैं, बल्कि खुद को ढाल भी सकते हैं। मॉड्यूलरिटी और AI-आधारित डिजाइन का यह मेल आने वाले समय में सर्च-एंड-रेस्क्यू (खोज और बचाव), अंतरिक्ष अन्वेषण और यहाँ तक कि विकासवादी जीव विज्ञान (evolutionary biology) के बुनियादी सवालों को सुलझाने में क्रांतिकारी साबित हो सकता है।