समुद्र में चीन की नई चुनौती: स्वायत्त ड्रोन जहाजों का झुंड

अगर आपको लग रहा था कि अरबों डॉलर के एयरक्राफ्ट कैरियर समंदर के बेताज बादशाह हैं और उन्हें कोई छू भी नहीं सकता, तो जरा ठहरिए। चीन ने समंदर की लहरों पर ‘गालागा’ (Galaga) गेम का असली वर्जन खेलना शुरू कर दिया है। हाल ही में गुआंग्डोंग प्रांत के Zhuhai तट पर हुए एक युद्धाभ्यास के फुटेज सामने आए हैं, जिसमें People’s Liberation Army Navy (PLAN) अपने L30 Unmanned Surface Vessels (USVs) के एक खतरनाक ‘स्वार्म’ (झुंड) का परीक्षण कर रही है। यह नजारा जितना हाई-टेक है, उतना ही डरावना भी।

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वीडियो में बिना किसी इंसानी क्रू वाली ये स्लीक और लो-प्रोफाइल ड्रोन नावें समंदर में बड़ी फुर्ती से जटिल पैंतरेबाजी करती दिख रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन L30 USVs ने स्वायत्त (autonomous) गश्त, टोह लेने और संदिग्ध जहाजों को रोकने का सफल प्रदर्शन किया। 7.5 मीटर लंबी ये नावें 35 नॉट (करीब 65 किमी/घंटा) की रफ्तार पकड़ सकती हैं और इनकी ऑपरेशनल रेंज 300 नॉटिकल मील से भी ज्यादा है। इन्हें सिर्फ निगरानी के लिए नहीं, बल्कि “एक्टिव एनफोर्समेंट” के लिए बनाया गया है—जो कूटनीतिक भाषा में कहने का तरीका है कि ये जरूरत पड़ने पर दुश्मन के जहाज से टकराकर उसे पस्त करने की ताकत रखती हैं।

यह महज कोई टेक-डेमो नहीं है; यह नौसैनिक रणनीति में एक बड़े बदलाव का शंखनाद है। 25 मार्च, 2026 के आसपास हुए इस अभ्यास ने “सेंट्रलाइज्ड कमांड और डीसेंट्रलाइज्ड एग्जीक्यूशन” की ताकत दिखाई। इसका मतलब है कि यह पूरा झुंड एक ही दिमाग से चलने वाले किसी शातिर शिकारी की तरह काम करता है। अकेले में भले ही ये छोटी नावें बेअसर लगें, लेकिन इनकी असली ताकत इनकी भारी तादाद और ‘डिस्पोजेबल’ (खर्च हो जाने वाली) प्रकृति में छिपी है।

आखिर यह इतना अहम क्यों है?

विशालकाय और सैकड़ों सैनिकों वाले भारी-भरकम युद्धपोतों का दौर अब ढलान पर नजर आ रहा है। उनकी जगह अब ये छोटी, सस्ती और जानलेवा रोबोटिक ‘पिरान्हा’ नावें ले रही हैं। मिलिट्री रणनीतिकार इसे “Asymmetric Warfare” (असमान युद्ध) कहते हैं। आखिर कोई देश अरबों डॉलर का डिस्ट्रॉयर और सैकड़ों नौसैनिकों की जान जोखिम में क्यों डालेगा, जब वही काम AI से लैस सैकड़ों सस्ती नावें कर सकती हैं, जिन्हें खोने का कोई गम न हो?

यह तकनीक सीधे तौर पर U.S. Navy के उन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिन्हें अब तक समंदर का सिकंदर माना जाता था। गणित सीधा और बेरहम है: ड्रोन का एक बड़ा झुंड दुनिया के सबसे आधुनिक डिफेंस सिस्टम को भी अपनी तादाद से पस्त (saturate) कर सकता है। चीन अपनी “Intelligentization” डॉक्ट्रिन—यानी सैन्य क्षेत्र में AI को पूरी तरह समाहित करने की नीति—पर जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए आने वाले समय में समंदर में ऐसे कई ‘रोबोटिक भेड़ियों’ के झुंड दिखाई देंगे। दुनिया भर के नेवल प्लानर्स के लिए अब सतर्क हो जाने का वक्त आ गया है।