एक ऐसी कहानी जिसे कोई सनकी साइंस-फिक्शन लेखक भी ‘हजम न होने वाली’ कहकर खारिज कर दे, उसे हकीकत बना दिया है जर्मनी के स्टार्टअप SWARM Biotactics ने। इस कंपनी ने घोषणा की है कि उन्होंने प्रोग्रामेबल सायबॉर्ग कीटों (cyborg insect swarms) की एक ऐसी फौज तैयार कर ली है, जिसे टेस्ट करने के बाद NATO के ग्राहकों के लिए तैनात भी किया जा चुका है। हैरानी की बात यह है कि एक साल पहले तक इस कंपनी का वजूद भी नहीं था, और आज यह जर्मन सशस्त्र बल (Bundeswehr) जैसे क्लाइंट्स के लिए बायो-रोबोटिक जासूसी यूनिट्स तैयार कर रही है। दोस्तों, आपके टैक्स के पैसों का क्या ‘अतरंगी’ इस्तेमाल हो रहा है!
इस तकनीक के पीछे का विज्ञान जितना दिलचस्प है, उतना ही डरावना भी। इसमें जीवित कीटों—खासकर बेहद सख्तजान माने जाने वाले ‘मेडागास्कर हिसिंग कॉकरोच’ (Madagascar hissing cockroaches)—की पीठ पर खास तौर से डिजाइन किए गए ‘बैकपैक्स’ लगा दिए जाते हैं। ये आपके घर में घूमने वाले साधारण कॉकरोच नहीं हैं; ये बायोइलेक्ट्रॉनिक न्यूरल इंटरफेस (bioelectronic neural interfaces), मॉड्यूलर सेंसर, Edge AI और सुरक्षित संचार प्रणालियों से लैस ‘बायो-रोबोट्स’ हैं। इसकी मदद से ऑपरेटर इन जीवों को व्यक्तिगत रूप से कंट्रोल कर सकते हैं या उन्हें एक स्वायत्त झुंड (autonomous swarm) के रूप में उन तंग और खतरनाक जगहों पर जासूसी (ISR missions) के लिए भेज सकते हैं, जहाँ पारंपरिक ड्रोन का पहुँचना नामुमकिन है। महज 12 महीनों के भीतर, कंपनी ने 40 से अधिक कर्मचारियों की टीम खड़ी कर ली है और इस डिस्टोपियन विजन को धरातल पर उतारने के लिए €13 मिलियन (लगभग ₹115 करोड़) की फंडिंग भी जुटा ली है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है?
SWARM Biotactics सिर्फ एक बेहतर ड्रोन नहीं बना रही, बल्कि यह रोबोटिक्स की दुनिया में एक बिल्कुल नया ‘स्केलिंग लॉ’ पेश कर रही है। जटिल और महंगी मैन्युफैक्चरिंग पर निर्भर रहने के बजाय, इनका प्लेटफॉर्म ‘ब्रीडिंग’ (प्रजनन) के जरिए अपनी तादाद बढ़ाता है। यह मैकेनिकल सिस्टम से हटकर बायोलॉजिकली इंटीग्रेटेड सिस्टम की ओर एक बुनियादी बदलाव है। कंपनी का साफ कहना है कि उनके प्रतिद्वंद्वी पहले से ही मिलिट्री बायो-रोबोटिक्स में भारी निवेश कर रहे हैं, ऐसे में इस ‘कैपेबिलिटी गैप’ को भरने के लिए यह सायबॉर्ग कॉकरोच आर्मी समय की मांग है। भले ही फिलहाल इसका इस्तेमाल डिफेंस और डिजास्टर रिस्पॉन्स के लिए हो रहा है, लेकिन इसके नैतिक और भविष्यवादी परिणाम चौंकाने वाले हैं। यह प्रकृति और सैन्य हार्डवेयर के बीच की धुंधली होती सीमाओं के एक नए ‘पेंडोरा बॉक्स’ को खोलने जैसा है। ‘जीती-जागती मशीनों’ के युग में आपका स्वागत है।













