अमेरिकी वायुसेना ने इतिहास रचते हुए पहली बार एक ड्रोन को आधिकारिक तौर पर ‘फाइटर जेट’ की उपाधि दी है। यह सम्मान मिला है Anduril Industries, Inc. के YFQ-44A Fury को। इस जेट-पावर्ड, AI-पायलट वाले विमान को ‘F’ (Fighter) की श्रेणी में इसलिए रखा गया क्योंकि इसने पूरी तरह से ऑटोनॉमस उड़ान भरकर सबको चौंका दिया। हाई-स्पीड टैक्सी और टेक-ऑफ से लेकर जटिल हवाई युद्धाभ्यास (maneuvers) तक, इसने वही परफॉर्मेंस दिखाई जो एक इंसानी पायलट वाला F-16 दिखाता है। न कोई पायलट, न कोई रिमोट कंट्रोल—ड्राइवर की सीट पर बैठा है तो बस एक शातिर AI दिमाग।
‘Air and Space Forces Association Warfare Symposium’ में सामने आई यह उपलब्धि हवाई युद्ध (aerial combat) के तौर-तरीकों में एक बड़े बदलाव का संकेत है। जहां F-35 जैसे पुराने प्रोग्राम 90 के दशक से चल रहे हैं और जिनका अनुमानित खर्च 2 ट्रिलियन डॉलर के पार जा चुका है, वहीं Fury को कोरे कागज से पहली उड़ान तक पहुंचने में महज 556 दिन लगे। हाल ही में इसने अपने एयरफ्रेम पर एक डमी AIM-120 AMRAAM मिसाइल के साथ ‘कैप्टिव-कैरी’ फ्लाइट टेस्ट भी सफलतापूर्वक पूरे किए हैं।
हालांकि Anduril की यह कामयाबी बड़ी है, लेकिन वे Collaborative Combat Aircraft (CCA) के प्रोटोटाइप को आसमान में ले जाने वाले पहले खिलाड़ी नहीं थे। उनकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी General Atomics ने 27 अगस्त, 2025 को अपने YFQ-42A “Dark Merlin” को उड़ाकर बाजी मार ली थी, जो Fury की 31 अक्टूबर की पहली उड़ान से दो महीने पहले की बात है। अब दोनों कंपनियां 2026 के प्रोडक्शन कॉन्ट्रैक्ट को हथियाने के लिए एक-दूसरे के सामने ‘फ्लाई-ऑफ’ (हवाई मुकाबले) के मैदान में हैं।
यह खबर इतनी अहम क्यों है?
यह “F” दर्जा सिर्फ सांकेतिक नहीं है; यह इस बात का खुला ऐलान है कि ऑटोनॉमस हवाई युद्ध का युग दस्तक दे चुका है। ये CCAs असल में ‘वफादार विंगमैन’ (loyal wingmen) की तरह काम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। ये इंसानी पायलटों वाले फाइटर जेट्स से आगे चलकर दुश्मन के इलाके की टोह लेंगे, खतरों से लोहा लेंगे और एक ऐसी ‘अफोर्डेबल मास’ (सस्ती और बड़ी फौज) तैयार करेंगे जिसका मुकाबला करना पुराने विमानों के बस की बात नहीं होगी। Anduril के लिए, जो एक वेंचर-बैक्ड स्टार्टअप है और जिसकी वैल्यू अब 30 बिलियन डॉलर से ज्यादा है, यह सिर्फ एक सफल टेस्ट फ्लाइट नहीं है; यह पूरे डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को एक सीधी चुनौती है। कंपनी इन सिस्टम्स के मास-प्रोडक्शन के लिए 50 लाख स्क्वायर फीट की फैक्ट्री खड़ी कर रही है, जो साफ इशारा है कि आने वाले वक्त में हर ‘मैंड फाइटर’ (इंसानी पायलट वाला जेट) प्रोग्राम इतिहास का हिस्सा बन सकता है।













