अभी तो लग रहा था कि ह्यूमनॉइड रोबोट्स की महफ़िल पूरी तरह सज चुकी है, तभी एक और धुरंधर ने मैदान में अपनी धमक दिखा दी है। ब्रिटेन के स्टार्टअप Humanoid AI ने अपने दो पैरों वाले रोबोट HMND 01 Alpha को दुनिया के सामने पेश कर दिया है, जो इस ‘बाइपेडल’ रेस में कंपनी की आधिकारिक एंट्री है। इससे पहले कंपनी ने इसका पहियों वाला (wheeled) वर्जन दिखाया था, जिससे साफ है कि वे इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन के बाजार को पकड़ने के लिए एक ‘डुअल-प्लेटफॉर्म’ रणनीति पर काम कर रहे हैं। कंपनी का दावा है कि उन्होंने इस रोबोट को महज सात महीनों में तैयार किया है—रोबोटिक्स जैसे क्षेत्र में, जहां विकास की रफ्तार सालों में मापी जाती है, यह वाकई में किसी करिश्मे से कम नहीं है।
शुरुआती स्पेसिफिकेशन पर नजर डालें तो HMND 01 Alpha की लंबाई 1.79 मीटर है और इसमें 29 डिग्री ऑफ फ्रीडम (DOF) दिए गए हैं (हाथों को छोड़कर)। इसे असल काम के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें 15 किलोग्राम तक का वजन उठाने की क्षमता है। ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से या तो 12-DOF वाले बेहद लचीले ‘डेक्सटेरस’ हाथ चुन सकते हैं या फिर साधारण ग्रिपर्स। यह पूरा सिस्टम VLA-आधारित ऑटोनॉमस फ्रेमवर्क (Vision-Language-Action) पर चलता है, जो इसे देखने, समझने और काम करने की ताकत देता है। फिलहाल इसका ऑपरेटिंग टाइम तीन घंटे बताया गया है। Humanoid AI का सीधा निशाना लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस और रिटेल सेक्टर पर है, जहां यह रोबोट सामान उठाने, छंटनी करने और मशीनों में माल लोड करने जैसे उबाऊ काम संभाल सके।
यह खबर क्यों मायने रखती है?
आज जब इस फील्ड में Tesla का Optimus, Figure AI का 02 और Boston Dynamics का Atlas जैसे दिग्गज पहले से जमे हुए हैं, तो किसी भी नए खिलाड़ी के पास कुछ ‘हटके’ होना जरूरी है। Humanoid AI की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यावहारिक सोच हो सकती है—पहियों और पैरों, दोनों तरह के प्लेटफॉर्म देना ग्राहकों को उनकी जरूरत के हिसाब से मोबिलिटी चुनने की आजादी देता है। हालांकि इसका 15 किलो का पेलोड तो बढ़िया है, लेकिन 3 घंटे का रनटाइम इसके प्रतिद्वंद्वियों (जैसे Apptronik का Apollo या Figure 02) के 4-8 घंटों के मुकाबले थोड़ा कम नजर आता है। फिर भी, रिकॉर्ड तोड़ डेवलपमेंट स्पीड और लॉजिस्टिक्स जैसे ठोस सेक्टर पर फोकस की वजह से इस ब्रिटिश रोबोट पर नजर रखना जरूरी है। ह्यूमनॉइड्स की यह रेस अब सिर्फ चकाचौंध वाले डेमो तक सीमित नहीं रह गई है; अब असली जीत उसकी होगी जो सबसे पहले एक काम करने वाली और मुनाफा देने वाली मशीन बाजार में उतार पाएगा।













