जब पूरी दुनिया भविष्य की उड़ने वाली टैक्सियों के सिर्फ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और कागजी प्लान बनाने में मशगूल है, चीन ने असलियत में इंजन स्टार्ट कर दिया है। सिविल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना (CAAC) ने बिना पायलट वाले पैसेंजर ड्रोन्स के लिए दुनिया का पहला ‘कमर्शियल ऑपरेशन सर्टिफिकेट’ जारी कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब EHang Holdings Limited और Hefei Hey Airlines Co., Ltd. जैसी कंपनियां अपने ऑटोनॉमस इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट्स में लोगों को बिठाकर उनसे किराया वसूल सकेंगी।
यह कोई मामूली टेस्ट फ्लाइट की इजाजत नहीं है। यह ‘ऑपरेटर सर्टिफिकेट’ (OC) उस रेगुलेटरी पहेली का आखिरी और सबसे अहम टुकड़ा है, जो टाइप, प्रोडक्शन और एयरवर्थनेस सर्टिफिकेट के बाद आता है। चीन के सरकारी मीडिया ने इसे एक सटीक मिसाल से समझाया है: यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कार बनाने की मंजूरी मिलने और फिर उसे सड़क पर टैक्सी के तौर पर चलाने का लाइसेंस मिलने के बीच का फर्क। EHang का दो सीटों वाला EH216-S ड्रोन अब दुनिया का पहला ऐसा पैसेंजर eVTOL बन गया है जिसके पास ये ‘चारों सर्टिफिकेट’ मौजूद हैं। शुरुआती तौर पर ये सेवाएं गुआंगझू और हेफ़ेई जैसे शहरों में लो-एल्टीट्यूड टूरिज्म और साइटसीइंग के लिए शुरू की जाएंगी, यानी ऑफिस जाने के लिए इनका इस्तेमाल होने में अभी थोड़ा वक्त है।
यह खबर इतनी बड़ी क्यों है?
इस कदम के साथ ही चीन ने ग्लोबल एयर टैक्सी की रेस में सबको मीलों पीछे छोड़ दिया है। जो चीज अब तक किसी भविष्यवादी कल्पना जैसी लगती थी, वह अब एक कमर्शियल हकीकत बन चुकी है। जहां Joby और Archer जैसी पश्चिमी प्रतिद्वंद्वी कंपनियां अभी भी अपने विमानन अधिकारियों के नियमों और कागजी कार्रवाई के चक्रव्यूह में फंसी हुई हैं (जिसके 2025 के अंत से पहले सुलझने की उम्मीद कम ही है), वहीं चीन ने न सिर्फ एक मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है, बल्कि ऑपरेटर्स को हरी झंडी भी दिखा दी है। ‘लो-एल्टीट्यूड इकोनॉमी’ यानी निचले आसमान की इस अर्थव्यवस्था में चीन का यह आक्रामक रुख सिर्फ टेक्नोलॉजी के बारे में नहीं है, बल्कि उसे दुनिया के सामने पेश करने की हिम्मत के बारे में भी है। फिलहाल के लिए, चीन के चुनिंदा शहरों में आसमान पर आधिकारिक तौर पर रोबॉट्स का कब्जा होने जा रहा है।













