जहाँ यूरोप अभी कमेटियों और कागजी कार्रवाई के जंजाल में उलझा है, वहीं Tesla, Inc. जमीन पर रोबोट्स की फौज खड़ी कर रही है। कैलिफोर्निया के फ्रेमोंट (Fremont) में Optimus ह्यूमनॉइड रोबोट की पायलट प्रोडक्शन लाइन की हालिया तस्वीरों ने एक नई बहस छेड़ दी है। ये तस्वीरें साफ बयां करती हैं कि अमेरिकी ‘एग्जीक्यूशन’ (काम करने की रफ्तार) और यूरोपीय ‘डेलिब्रेशन’ (सिर्फ विचार-विमर्श) के बीच की खाई कितनी गहरी हो चुकी है। एक तरफ जहाँ ये ह्यूमनॉइड रोबोट्स किसी कार की तरह असेंबली लाइन पर तैयार हो रहे हैं, और Elon Musk सालाना 10 लाख यूनिट्स बनाने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यूरोपीय संघ (EU) अभी भी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क्स और एथिक्स बोर्ड्स की फाइलों में ही खोया हुआ है।
रोबोटिक्स एक्सपर्ट Ilir Aliu की एक टिप्पणी इस पूरी स्थिति को सटीक तरीके से बयां करती है: “अमेरिका और चीन रोबोट बना रहे हैं, जबकि यूरोप सिर्फ कमेटियां बना रहा है।” उनका यह तंज यूरोपीय टेक जगत की उस बढ़ती हताशा को दिखाता है जहाँ टैलेंट की तो कोई कमी नहीं है, लेकिन उस टैलेंट के हाथ ‘प्री-एम्प्टिव रेगुलेशन’ (काम शुरू होने से पहले ही नियम थोपना) की बेड़ियों से बंधे हुए हैं। असली समस्या हुनर की कमी नहीं, बल्कि उस ‘परमिशन’ की है जो इनोवेशन को रफ्तार पकड़ने से पहले ही रोक देती है।
यह चर्चा में क्यों है?
यह मामला सिर्फ Tesla या किसी एक रोबोट तक सीमित नहीं है। यह असल में दुनिया के सामने इनोवेशन की दो अलग-अलग विचारधाराओं का एक लाइव केस स्टडी है। अमेरिका और चीन इस समय ऑटोमेशन की रेस में अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, क्योंकि वे रोबोटिक्स को भविष्य की अर्थव्यवस्था और मैन्युफैक्चरिंग की रीढ़ मानते हैं।
वहीं दूसरी ओर, यूरोप सुरक्षा और एथिकल परफेक्शन के चक्कर में खुद को इतना ज्यादा रेगुलेट कर रहा है कि वह इस दौड़ में पूरी तरह पिछड़ने की कगार पर है। खतरा यह है कि जब दुनिया भविष्य का निर्माण कर रही होगी, तब यूरोप शायद इस बात पर मीटिंग के ‘मिनट्स’ (Minutes of meeting) लिख रहा होगा कि उस भविष्य को बनाने के नियम क्या होने चाहिए।













