Figure CEO का UBTECH पर बड़ा आरोप: क्या रोबोट वीडियो 'फेक' है?

ह्यूमनाइड रोबोटिक्स की दुनिया आजकल किसी हाई-वोल्टेज ड्रामे से कम नहीं लग रही। Figure के CEO Brett Adcock ने चीनी प्रतिद्वंद्वी UBTECH Robotics Corp Ltd के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। Adcock ने आरोप लगाया है कि UBTECH ने अपने रोबोट्स के मास-प्रोडक्शन का जो वीडियो जारी किया है, वह दरअसल कंप्यूटर-जेनरेटेड इमेजरी (CGI) का एक मायाजाल है। सार्वजनिक बहस से कभी पीछे न हटने वाले Adcock ने उस वीडियो पर सवाल उठाए हैं जिसमें UBTECH के Walker S2 ह्यूमनाइड्स की कतारें दिखाई गई हैं; उनका कहना है कि इस भीड़ में सिर्फ सबसे आगे खड़ा रोबोट ही असली है।

Adcock का यह दावा एक बेहद छोटी लेकिन तकनीकी बारीकी पर टिका है: रोबोट्स के सिर पर पड़ने वाला रिफ्लेक्शन। X पर अपनी एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “इस बॉट पर पड़ने वाली रोशनी को देखें और फिर उसके पीछे खड़े बॉट्स से उसकी तुलना करें… अगर आपको हेड यूनिट पर छत की लाइटों का रिफ्लेक्शन दिख रहा है, लेकिन पीछे वालों पर नहीं, तो यह साफ इशारा है कि यह CGI है।” शेयर की गई तस्वीर में चमकदार सिर (craniums) को ज़ूम करके दिखाया गया है, जहाँ पीछे खड़े मॉडल्स में रिफ्लेक्शन की वैसी बारीकियां नज़र नहीं आ रही हैं जैसी आगे वाले में हैं। अगर यह डिजिटल हेराफेरी सच साबित होती है, तो यह UBTECH के लिए बड़ा झटका होगा, जिसने हाल ही में घोषणा की थी कि उसे इस साल अपने Walker S2 मॉडल के लिए 800 मिलियन युआन (लगभग $112 मिलियन या 945 करोड़ रुपये) से अधिक के ऑर्डर मिले हैं।

यह आरोप ऐसे समय में आया है जब UBTECH अपनी मार्केटिंग में पूरी ताकत झोंक रही है और खुद को “ह्यूमनाइड रोबोट्स की दुनिया की पहली मास डिलीवरी” करने वाली कंपनी के रूप में पेश कर रही है। हांगकांग स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होने वाली पहली ह्यूमनाइड रोबोटिक्स फर्म UBTECH ने 2025 के लिए कई बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स का ऐलान किया है और उसका लक्ष्य इस साल 500 से अधिक इंडस्ट्रियल रोबोट्स डिलीवर करने का है। हालांकि UBTECH ने अभी तक इन CGI आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन इस घटना ने रोबोटिक्स इंडस्ट्री में ‘दिखावे बनाम हकीकत’ की जंग को और तेज कर दिया है।

यह खबर क्यों मायने रखती है?

ह्यूमनाइड रोबोट्स बनाने की इस बेहद खर्चीली रेस में, अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को साबित करना उतना ही जरूरी है जितना कि अपनी तकनीक को। शानदार सिनेमाई वीडियो बनाना मार्केटिंग का हिस्सा हो सकता है, लेकिन अगर प्रोडक्शन क्षमता को लेकर ‘फेक’ होने के आरोप लगते हैं, तो इससे निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा टूट सकता है। एक सीधे कॉम्पिटिटर द्वारा सार्वजनिक रूप से उंगली उठाना यह दर्शाता है कि कंपनियां खुद को रेस में आगे दिखाने के लिए कितने भारी दबाव में हैं। अब चाहे UBTECH का वीडियो एक ‘क्रिएटिव विजुअलाइजेशन’ हो या जानबूझकर किया गया धोखा, इस विवाद ने रोबोटिक्स कंपनियों के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है: विश्वसनीयता (Authenticity)