मशीनों और इंसानों के साझा भविष्य की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए, Anthropic ने 12 नवंबर, 2025 को यह घोषणा की है कि उनका Claude AI अब रोबोटिक डॉग को प्रोग्राम करने में पूरी तरह सक्षम हो गया है। Project Fetch नाम के इस दिलचस्प प्रयोग में, शोधकर्ताओं ने उन लोगों की दो टीमें बनाईं जिन्हें रोबोटिक्स का ‘र’ भी नहीं पता था। चुनौती थी—Unitree Go2 नाम के चार पैरों वाले रोबोट को प्रोग्राम करना। ट्विस्ट यह था कि एक टीम के पास ‘कोडिंग कोपायलट’ के रूप में Claude था, जबकि दूसरी टीम को Stack Overflow और सिर घुमा देने वाले डॉक्यूमेंटेशन के भरोसे छोड़ दिया गया था।
नतीजे बिल्कुल साफ थे। Claude की मदद ले रही टीम ने न केवल अपना काम लगभग आधे समय में निपटा लिया, बल्कि स्वायत्त तरीके से गेंद ढूँढकर लाने (autonomous ball retrieval) के टास्क में भी वही टीम सफल रही। Anthropic ने जब काम के दौरान हुई बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट्स का विश्लेषण किया, तो पाया कि बिना AI वाली टीम काफी “उलझन और हताशा” में थी—ठीक वैसी ही स्थिति जैसी किसी पेचीदा सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट के दौरान अक्सर डेवलपर्स की होती है। Claude ने विशेष रूप से इंटरनेट पर मौजूद विरोधाभासी जानकारियों को सुलझाने और रोबोट के सेंसर्स को कनेक्ट करने के लिए जरूरी कोड की ‘डीबगिंग’ (debugging) में कमाल की फुर्ती दिखाई।
आखिर यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
बात सिर्फ 16,900 डॉलर (लगभग 14.2 लाख रुपये) के रोबोटिक डॉग को ‘फेच’ (गेंद लाना) सिखाने की नहीं है। Project Fetch इस बात का पुख्ता सबूत है कि कैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) रोबोटिक्स जैसे बेहद जटिल और तकनीकी क्षेत्रों में एंट्री के बैरियर को खत्म कर रहे हैं। सामान्य बोलचाल की भाषा (Natural Language) को सीधे फंक्शनल कोड में बदलकर, ये AI सिस्टम अब उन लोगों को भी रोबोटिक समाधान तैयार करने की ताकत दे रहे हैं जो इस विषय के एक्सपर्ट नहीं हैं। इसका असर लॉजिस्टिक्स से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक, हर जगह देखने को मिल सकता है।
इससे भी बड़ी बात यह है कि यह प्रयोग AI के डिजिटल दुनिया से निकलकर भौतिक दुनिया (physical world) में कदम रखने की दिशा में एक बड़ा मोड़ है। Anthropic, जो हमेशा से AI सुरक्षा (AI Safety) के सिद्धांतों पर जोर देती रही है, इस बदलाव को बड़ी बारीकी से देख रही है। किसी AI के हाथ में एक ‘फिजिकल बॉडी’ की चाबियाँ थमाना कोई छोटी बात नहीं है, और यह प्रयोग जितना इसकी सफलता का जश्न मनाता है, उतना ही इससे जुड़े जोखिमों को समझने की कोशिश भी करता है।













