Boston Dynamics, अपनी हैरतअंगेज फुर्ती वाले उन रोबोट्स के लिए मशहूर है जिनके वीडियो अक्सर इंटरनेट पर तहलका मचा देते हैं। लेकिन अब कंपनी का पूरा ध्यान इन मशीनों के ‘दिमाग’ को और ज्यादा स्मार्ट बनाने पर है। लिस्बन में आयोजित Web Summit के दौरान कंपनी के CEO Robert Playter ने एक ऐसे भविष्य का खाका खींचा, जहां इन मशीनों को कंट्रोल करने के लिए आपको किसी जटिल प्रोग्रामिंग की जरूरत नहीं होगी—बस आपकी आवाज और इशारे ही काफी होंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि जल्द ही आप रोबोट को यह नहीं बताएंगे कि उसे ‘कैसे’ चलना है, बल्कि सिर्फ यह बताएंगे कि उसे ‘क्या’ करना है।
AI पर आधारित यह नई अप्रोच कंपनी के रोबोट्स को एक मशीन से बदलकर एक समझदार पार्टनर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। Spot के लिए, जो कि एक चार पैरों वाला रोबोट है और पहले से ही फैक्ट्रियों में थर्मल इंस्पेक्शन और गेज रीडिंग जैसे कामों में तैनात है, इसका मतलब बहुत बड़ा है। अब एक ऑपरेटर इसे बस इतना कह सकेगा कि “जरा उस खास मशीन को चेक करो,” और Spot अपना काम शुरू कर देगा। इससे मैन्युफैक्चरिंग फ्लोर से लेकर न्यूक्लियर फैसिलिटी जैसे मुश्किल हालातों में रोबोट्स का इस्तेमाल करना उन लोगों के लिए भी आसान हो जाएगा जो टेक एक्सपर्ट नहीं हैं। कंपनी अब Large Language Models (LLMs) का इस्तेमाल कर रही है ताकि रोबोट्स में ‘कॉमन सेंस’ विकसित हो सके और वे इंसानी बोलचाल को समझकर तुरंत रिएक्ट कर सकें।

स्मार्ट सॉफ्टवेयर की यह रेस सिर्फ Spot तक सीमित नहीं है। कंपनी का ‘वर्कहॉर्स’ कहा जाने वाला Stretch, जो गोदामों में हर साल लाखों बॉक्स इधर-उधर करने का जिम्मा संभालता है, अब AI की मदद से शिपिंग कंटेनर्स जैसे अस्त-व्यस्त माहौल में भी खुद को तेजी से ढाल सकेगा। वहीं, दो पैरों वाला Atlas अब भी जनरल-पर्पस रोबोटिक्स के लिए एक रिसर्च प्लेटफॉर्म बना हुआ है। हाल ही में इस पर Large Behavior Models (LBMs) को लेकर काम किया जा रहा है, जिससे यह ह्यूमनॉइड रोबोट सिर्फ साधारण बोलचाल के निर्देशों पर कई स्टेप्स वाले जटिल कामों को खुद-ब-खुद पूरा करना सीख रहा है।
यह खबर क्यों मायने रखती है?
Boston Dynamics का यह कदम एक बड़े बदलाव का संकेत है—अब मुकाबला सिर्फ शारीरिक फुर्ती (Mechanical Agility) का नहीं, बल्कि दिमागी क्षमता (Cognitive Ability) का है। नेचुरल लैंग्वेज और जेस्चर कंट्रोल के लिए एडवांस AI को जोड़कर कंपनी इन रोबोट्स को आम लोगों की पहुंच में लाना चाहती है। जटिल कोडिंग से हटकर सीधी बातचीत की ओर बढ़ना एक ऐसा ‘पैराडाइम शिफ्ट’ है, जो इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सेक्टर के साथ-साथ भविष्य में हमारे घरों में भी मोबाइल रोबोट्स की एंट्री को आसान बना देगा। अब बात सिर्फ बैकफ्लिप मारने वाले रोबोट की नहीं रह गई है; अब बात उस रोबोट की है जो आपकी बात को समझता है।













