ड्रोन तकनीक में चीन की बादशाहत: आसमान में दिखा हैरतअंगेज नजारा

एरियल टेक्नोलॉजी का भविष्य अब सिर्फ फाइलों और लैब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आसमान में एक सधे हुए तालमेल के साथ थिरकता नजर आ रहा है। यह नजारा जितना अद्भुत है, उतना ही भविष्य की आहट जैसा भी। चीन अपनी तकनीकी महारत का प्रदर्शन करते हुए उन सिंक्रोनाइज्ड ‘ड्रोन स्वार्म्स’ (drone swarms) को पेश कर रहा है, जो रात के अंधेरे को एक जादुई डिजिटल कैनवास में बदल देते हैं। ड्रोन डेवलपमेंट की इस रेस में चीन का कोई सानी नहीं है और DJI जैसे दिग्गज इस इंडस्ट्री में ‘टॉप डॉग’ के रूप में अपनी धाक जमा चुके हैं।

इन ड्रोन स्वार्म्स की सबसे दिलचस्प बात इनका जटिल प्रोग्रामिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम है। ये ड्रोन आपस में इस तरह तालमेल बिठाते हैं कि बिना टकराए अपनी सटीक पोजीशन बनाए रखते हैं। इसे आप एक ‘कलेक्टिव इंटेलिजेंस’ (collective intelligence) की तरह देख सकते हैं, जहाँ हर ड्रोन एक बड़े दिमाग के हिस्से की तरह काम करता है। इंसानी पायलटों के लिए मैन्युअल रूप से ऐसी फॉर्मेशन बनाना लगभग नामुमकिन है। इसके सैन्य इस्तेमाल (military applications) तो साफ नजर आते ही हैं, लेकिन एंटरटेनमेंट से लेकर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशंस तक, इसकी कलात्मक और कमर्शियल संभावनाएं भी असीमित हैं।

जहाँ एक तरफ पश्चिमी कंपनियां इस रेस में चीन की बराबरी करने के लिए जद्दोजहद कर रही हैं, वहीं ड्रोन टेक्नोलॉजी में चीन का भारी निवेश अब उसे जबरदस्त बढ़त दिला रहा है। आसमान में चमकते ये लाइट शोज सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि रोबोटिक्स के सबसे तेजी से बढ़ते सेक्टर में चीन के दबदबे का एक बड़ा स्टेटमेंट हैं। अब सवाल यह नहीं है कि ड्रोन स्वार्म्स हमारी दुनिया को बदलेंगे या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि कितनी जल्दी? और क्या बाकी दुनिया चीन की इस बढ़त का मुकाबला कर पाएगी?