यूरोपियन रोबोटिक्स फोरम (ERF2025) के मंच से जर्मनी के स्टेट सेक्रेटरी Udo Philipp ने एक ऐसा सधा हुआ संदेश दिया है, जो आने वाले समय में इस महाद्वीप की तकनीकी तकदीर बदल सकता है। उनका कहना है, “यूरोप को संरक्षणवादी (protectionist) नहीं होना चाहिए, लेकिन उसे भोला (naïve) बनने की भी ज़रूरत नहीं है।”
जर्मनी के संघीय आर्थिक मामलों और जलवायु कार्रवाई मंत्रालय (Federal Ministry for Economic Affairs and Climate Action) में अपनी अहम भूमिका निभा रहे Philipp ने एक व्यावहारिक और संतुलित बीच का रास्ता चुनने की वकालत की। उनका तर्क है कि यूरोप को वैश्विक नवाचार (global innovation) के लिए अपने दरवाजे खुले रखने की अपनी पुरानी परंपरा को तो बरकरार रखना ही चाहिए, लेकिन साथ ही तेजी से बदलते रोबोटिक्स के दौर में अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करने से भी पीछे नहीं हटना चाहिए।
अपने संबोधन में उन्होंने यूरोप के रोबोटिक्स इकोसिस्टम के भीतर ‘क्रॉस-बॉर्डर सहयोग’ की अहमियत पर खास जोर दिया। उन्होंने शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के दिग्गजों और सरकारी अधिकारियों के बीच और भी मजबूत साझेदारी का आह्वान किया। यह नजरिया इस बढ़ती समझ को दर्शाता है कि रोबोटिक्स तकनीक अब सिर्फ आर्थिक मुनाफे का जरिया भर नहीं रह गई है—इसे अब यूरोपीय संघ की ‘तकनीकी संप्रभुता’ (technological sovereignty) और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
आज जब दुनिया भर में एडवांस टेक्नोलॉजी को लेकर होड़ मची है, ऐसे में Philipp का यह संतुलित दृष्टिकोण उन यूरोपीय नीति-निर्माताओं के लिए एक रूपरेखा (framework) पेश करता है, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग, घरेलू नवाचार और रणनीतिक स्वायत्तता जैसे जटिल सवालों से जूझ रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब यूरोप खुद को एक बहुध्रुवीय (multipolar) तकनीकी परिदृश्य में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, जहाँ रोबोटिक्स की क्षमता ही भविष्य की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को तय करेगी।













