अमेरिकी समाज: AI और रोबोटिक्स को लेकर एक साझा चिंता?

2023 के एक सर्वे के नतीजे साफ़ इशारा कर रहे हैं कि आम जनता हाई-एंड रोबोटिक्स और AI की इस अंधी दौड़ पर लगाम कसने के मूड में है। करीब 60% लोग रोबोट-इंसान के हाइब्रिड (robot–human hybrids) को पूरी तरह बैन करने के पक्ष में हैं—कुछ पोल्स में तो यह संख्या 72% के करीब पहुँच गई है। इसी तरह, लगभग 58% लोग AI की मदद से “सुपरह्यूमन” बनने की कोशिशों को गैरकानूनी घोषित करना चाहते हैं, जबकि 63% का मानना है कि ऐसी किसी भी AGI (Artificial General Intelligence) पर पाबंदी होनी चाहिए जो इंसानी दिमाग से ज़्यादा स्मार्ट हो। दो-तिहाई से ज़्यादा आबादी तो यहाँ तक चाहती है कि सरकार को AI की रफ़्तार धीमी करने के लिए सख्त नियम-कायदे बनाने चाहिए।

साफ शब्दों में कहें तो, जनता का मिज़ाज किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा रोमांचक नहीं, बल्कि बेहद सतर्क है। वे मशीनों को “स्टैंडबाय” पर देखना चाहते हैं, न कि उन्हें अपनी जगह लेते हुए। बारीकियों पर गौर करें तो सबसे ज़्यादा डर उन चीजों से है जो सीधे हमारे अस्तित्व से जुड़ी हैं: “साइबॉर्ग” और इंसानी अपग्रेड्स को लेकर लगभग हर कोई पाबंदी की मांग कर रहा है। इसके उलट, केवल 53% लोग ही “सचेत” (sentient) या भावनाओं वाले AI को बैन करना चाहते हैं। इससे लगता है कि लोग कॉन्शियस रोबोट्स को अभी भी एक कोरी कल्पना ही मान रहे हैं। (हालांकि कुछ अन्य पोल्स में 69–70% लोग AI की चेतना पर बैन के पक्ष में हैं, लेकिन यह आंकड़ा हाइब्रिड्स पर लगने वाले बैन की तुलना में काफी कम है।)

नतीजा यह है कि इंसानियत को इस बात का खौफ ज़्यादा है कि कहीं वह खुद रोबोट न बन जाए (या किसी रोबोट के साथ रिश्ता न जोड़ ले), बजाय इसके कि रोबोट्स को भावनाएं महसूस होने लगें। नीति निर्माताओं (policy makers) के लिए इसका क्या मतलब है? इसका मतलब है कि उनके पास जनता का पूरा समर्थन है: 70% से ज़्यादा लोग जोखिम भरी तकनीक पर कार्रवाई चाहते हैं और 71% तो दो टूक कह रहे हैं—“रफ़्तार कम करो!”

क्या 2023 से अब तक हम कुछ बदले हैं?

Source: Effective Altruism Forum